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AISA ने 13 फरवरी को एक कारगर ‘कम्युनल वायलेंस (प्रिवेंशन,कंट्रोल एंड रिहैबिलिटेशन ऑफ़ विक्टिम्स ) बिल’ के लिए किया ‘मार्च टू पार्लियामेंट’

14 February 2014 672 views No Comment

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AISA ने 13 फरवरी को एक कारगर ‘कम्युनल वायलेंस (प्रिवेंशन,कंट्रोल एंड रिहैबिलिटेशन ऑफ़ विक्टिम्स ) बिल’  के लिए ‘मार्च टू पार्लियामेंट’  किया. साथ ही इस बिल को इसी सत्र में पास करवाने तथा  धारा 355 के तहत UP में हस्तक्षेप करने की मांग को लेकर क़रीब 1000 हस्ताक्षर भी होम मिनिस्टर को दिया. 

मार्च में JNU,जामिया मिल़िया इस्लामिया और दिल्ली विश्वविद्यालय से क़रीब 100 छात्र शामिल हुए.

JNU स्टूडेंट्स यूनियन के अध्यक्ष अकबर चौधरी ने कहा कि ‘आज एक तरफ़ दंगा पीड़ितों को ‘कुत्ते का पिल्ला’, ‘पेशेवर भिखारी’, ‘ISI का एजेंट’ कहकर उनका अपमान किया जा रहा है तो उसी समय पिछले 5 फरवरी को संसद में  ‘कम्युनल वायलेंस (प्रिवेंशन,कंट्रोल एंड रिहैबिलिटेशन ऑफ़ विक्टिम्स ) बिल’ को एक बार फिर से भारी विरोध का बहाना करके टाल दिया गया. संसद में यह बिल लम्बे समय से लंबित है. UPA सरकार पहले भी अलग अलग बहाने से इस बिल को टालती रही है. साम्प्रदायिक हिंसा पर रोक लगाने, दोषियों को सजा देने एवं पीड़ितों के उचित पुनर्वास हेतु लम्बे समय से एक कारगर कानून की मांग देश का प्रगतिशील तबका कर रहा है. मजबूत हस्तक्षेप एवं आन्दोलन के बाद UPA सरकार सांप्रदायिक हिंसा पर बिल लाने को मजबूर हुई. लेकिन अपने कार्यकाल के दस वर्षों में UPA सरकार ने कभी भी इस बिल पर कोई ठोस चर्चा या पहलकदमी करने की ज़हमत नहीं की. हाल में हुए मुजफ्फरनगर दंगे के बाद सांप्रदायिक हिंसा पर बिल लाने की मांग तेज हुई. इसके दबाब में सरकार ने विगत 5 फ़रवरी को राज्यसभा में ‘कम्युनल वायलेंस (प्रिवेंशन,कंट्रोल एंड रिहैबिलिटेशन ऑफ़ विक्टिम्स ) बिल’ को पेश किया. जिसे भाजपा, माकपा, सपा, द्रुमुक, अन्नाद्रुमुक जैसे दलों के विरोध के बाद वापस ले लिया गया. भाजपा शुरु से ही इस बिल का ‘हिन्दू विरोधी’ कहकर विरोध करती रही है. इस बार सपा, तृणमूल, द्रुमुक, अन्नाद्रुमुक जैसे तथाकथित सेक्युलर पार्टियों ने भी इसका विरोध किया. ये दल इस बिल को राज्य के मामलों में केंद्र की दखलंदाजी मानते है. माकपा के पोलितब्यूरो मेम्बर सीताराम येचुरी ने कहा की संसद इस कानून को नहीं बना सकती. इन तथाकथित सेक्युलर पार्टियों ने शर्मनाक तरीके से भाजपा द्वारा इस बिल के विरोध को और मजबूती दी. भाजपा के अरुण जेटली ने इस बिल का  विरोध  इन्हीं  दलों के सुर में सुर मिलाकर   किया . इस कारण संसद में एक बार फिर से सरकार को साम्प्रदायिक हिंसा संबंधित बिल को टालने का मौका मिला.’

CPIML के असलम खान  ने कहा कि  ‘कम्युनल वायलेंस (प्रिवेंशन,कंट्रोल एंड रिहैबिलिटेशन ऑफ़ विक्टिम्स ) बिल’ में शामिल मुद्दों पर बहस करने के जगह ये दल गैरजरूरी बहसों में उलझे रहे. इतिहास गवाह है कि आज़ादी के बाद जितने भी दंगे हुए हैं उसमें किसी को भी सजा नहीं हुई है.  1983 के नेल्ली नरसंहार, 84 के  सिख विरोधी दंगे, बाबरी मस्जिद ध्वंस, 2002 के गुजरात दंगे या हाल में हुए मुजफ्फ़रनगर दंगों जैसी साम्प्रदायिक घटनाओं के पीड़ितों को आज तक न्याय नहीं मिला है. ये दंगे सुनियोजित एवं टार्गेटेड थे. सरकारी मशीनरी भी दंगाईयों के साथ थीं.

दिल्ली आइसा के joint सेक्रेटरी पीयूष ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि ‘ एक ऐसा कानून हो जो सांप्रदायिक दंगों को रोकने में कारगर हो, सुनियोजित एवं टार्गेटेड दंगों के दोषियों को तुरंत सजा मिले, पीड़ितों के पुनर्वास के ठोस उपाय हो, दंगा रोकने में विफल अधिकारियों को सजा मिले तथा प्रशासन एवं पुलिस की जबाबदेही तय हो, दंगों के समय महिलाओं पर किये गए अत्याचार के लिए अलग से प्रावधान हो. दरअसल  ‘दंगे होते नहीं करवाये जाते हैं’ इसलिए यह जरुरी है कि  दंगों के लिए आलाधिकारियों पर प्रशासनिक जबाबदेही  तय हो  और   दंगे रोकने में विफल होने पर ऐसे अधिकारियों को सजा मिले. अधिकारियों को  सजा के प्रावधान से दंगों के समय पुलिस कारवाई में राजनीतिक हस्तक्षेप पर भी लगाम  लगेगी. चूकीं दंगों का चरित्र हमेशा सुनियोजित एवं टार्गेटेड होता है और इसमें सबसे 

ज्यादा समाज के गरीब तबके के लोग प्रभावित होते हैं. इसलिए हमारी मांग है कि दंगा पीड़ितों के लिए इस बिल में पुनर्वास के ठोस प्रावधान हों और सरकार को इस के लिए जबाबदेह किया जाए.’     

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जाम़िया आइसा के सचिव फरहान ने कहा कि लोकसभा चुनावों से पहले संसद का यह अंतिम सत्र है. पूरे देश में साम्प्रदायिक तनाव का माहौल पैदा करने की कोशिश हो रही है. आरएसएस और मोदी के नेतृत्व में कारपोरेट-फासीवादी ताकतें अपने को भ्रष्ट UPA के विकल्प के तौर पर पेश कर रही है. भाकपा-माकपा जैसे वामदलों ने तीसरे मोर्चे के नाम पर जदयू, सपा, अन्नाद्रुमुक जैसी अवसरवादी  पार्टियों के सामने घुटने टेक दिए हैं. ऐसी स्थिति में देश के सच्चे सेक्युलर एवं जनवादी शक्तियों को एक कारगर ‘कम्युनल वायलेंस (प्रिवेंशन,कंट्रोल एंडरिहैबिलिटेशन ऑफ़ विक्टिम्स ) बिल’ के लिए एकजूट होना होगा.

‘कम्युनल वायलेंस (प्रिवेंशन,कंट्रोल एंड रिहैबिलिटेशन ऑफ़ विक्टिम्स ) बिल’ को  अविलम्ब संसद से पास करो !!

  मुजफ्फ़रनगर के पीड़ितों को न्याय दो !!

धारा 355 के तहत UP में हस्तक्षेप करो !!                                                       

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