बिरसा मुंडा की धरती पर न्याय के लिए भटकते आदवासी

प्रदर्शन के दौरान आदिवासियों व पुलिस की बातचीत

झारखण्ड के पलामू ज़िले के पाटन ब्लॉक के मोराल गांव में 29 अप्रैल 2020 को 9वी क्लास की छात्रा सोनम के साथ सामूहिक बलात्कार किया गया और उसकी हत्या कर दी गई। सोनम (पीड़िता) कोविड-19 लॉकडाउन में अपने हॉस्टल से घर आई हुई थी।

हिंदुस्तान अखबार में घटना का अंश

घटना के बाद पीड़िता के पिता ने आरोपियों के खिलाफ सबूत के तौर पर पुलिस को फ़ोन कॉल डिटेल्स पुलिस को दिए। जिसके आधार पर पुलिस ने तीन आरोपी पृथ्वी सिंह, विशाल और गुरदयाल सिंह को हिरासत में लिया। लेकिन आरोपियों के रसूख वाले होने के कारण हर बार की तरह पुलिस ने गवाहों को ही प्रताड़ित करना आरम्भ कर पूरे मामले को ही एक अलग रंग दे कर गवाहों का अभाव बता कर आरोपियों को छोड़ दिया। और आरोपियों की दलाली करते हुए और अपने पुलिस धर्म का पालन करते हुए सबूतों को मिटाया। इस बीच जब गांव वालो और गांव के युवाओं ने न्याय के लिए आवाज़ उठाया तो पुलिस ने उलटे गांव वालो , युवाओ और JNU की एक पूर्व छात्रा पर हत्या और संपत्ति नुकसान का केस दर्ज़ कर सभी को उत्पीड़ित करना शुरू कर दिया। साथ ही इन पर लॉकडाउन के नियमो के उलंघन और तथाकथित लोकसेवकों के साथ हाथापाई करने का आरोप भी इनके सर मढ़ दिया और हुए अपराध और अपराधियों के तरफ से आंखे मूंद ली।

इन तीनो आरोपियों (पृथ्वी सिंह , विशाल और गुरदयाल सिंह) पर खुलेआम गांव के आदिवासियों और दलितों को डराने-धमकाने, बलात्कार-हत्या का सार्वजानिक रूप से दावा करने का आरोप भी है। पुलिस और आरोपियों की मिलीभगत से एक कृत्रिम कहानी रची गई और उसके आधार पर उलटे पीड़िता के परिवार के कई सदस्यों पर और गांव के 200 अनाम लोगो सह JNU की पूर्व छात्रा दिव्या भगत पर हत्या के प्रयास जैसे मामले दर्ज़ कर दिए गए। गांव वालों की तरफ से न्याय की गुहार वाला की भाजपा से MP पुष्पा देवी से और प्रान्त के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन (झारखण्ड मुक्ति मोर्चा) से की गई लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई और स्थिति जस की तस रही।

1 जून को न्याय के लिए प्रदर्शन करते लोग

वास्तविक आरोपियों को सजा दिलाने और पीड़िता के परिवार वालों को न्याय दिलाने के आशा से गांव के लोगों ने एक मशाल जुलुस (महामारी और शारीरिक दूरी का पूरा ख्याल करते हुए) निकाला। अगले दिन जब गांव वाले इन सब मुद्दों को लेकर बैठक कर रहे थे तभी वहां पुलिस आ कर गांव वालों को जातिसूचक गालियां देती है और धमकाती है। इसके बाद से ही अब प्रोटेस्ट करने वालो में से एक गायब हो जाता है। लोग फिर इन सब मामले को ले कर SHO का घेराव् करते हैं और ज़िले के SP से उचित कार्यवाही की मांग करती है। उधर से 24 घंटे के अंदर करवाई का वादा भी मिलता है। लेकिन इस उचित कार्यवाही की जगह उलटे गांव वालो पर केस दर्ज़ होता है।

देश में कई जनवादी कार्यकर्ताओं और छात्रों पर झूठे आरोप और मुक़दमे दर्ज़ कर उन्हें जेल में डाल दिया गया है जैसे असहमति की आवाज़ हर तरफ से दबा दी जाएगी। अमीरपरस्त-फासिस्ट ताक़तें पूरी दुनिया में कोविड-19 लॉकडाउन का इस्तेमाल असहमति के उठती आवाज़, मजदूरों, मजलूमों की आवाज़ों को दबाने में राज्य शक्तियों का भरपूर प्रयोग कर रही है।

 

admin

One thought on “बिरसा मुंडा की धरती पर न्याय के लिए भटकते आदवासी

  1. ऐसे हेवानो को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए

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